
ये ‘धक धक’ से बहुत पहले की कहानी है, लेकिन धड़कनें तो बढ़ा ही देती है। तब महज 13 साल की थीं सरोज खान और दिल आया 30 साल बड़े एक शख्स पर। वह शख्स जो उन्हें नृत्य की बारीकियां सिखा रहा था, जो उनका गुरु था। मगर, दिल के आगे किसका जोर चला है? सरोज खान ने भी उम्र की सीमा को आड़े नहीं आने दिया और मासूम उम्र में घर बसा लिया। यहां तक की यह कहानी किसी को भी सुखद लग सकती है, लेकिन हकीकत में प्यार की इस कहानी में ढेर सारे तीखे मोड़ हैं और बहुत आगे फिसलन भी…। लिहाजा, बचपन में किए गए प्रेम विवाह के बाद सरोज संघर्ष के कठिन दौर से गुजरीं। आज उन्हीं सरोज खान की पुण्यतिथि है। आइए जानते हैं उनके बारे में…

मास्टर जी के रूप में बनाई पहचान
कोरियोग्राफी की दुनिया में सरोज खान को सब ‘मास्टर जी’ कहकर पुकारते थे, मगर यह पदवी हासिल करने के सफर में उन्हें कठिन संघर्ष से गुजरना पड़ा। निजी और पेशेवर दोनों ही जिंदगियों में उन्होंने कठिन मेहनत की। बता दें कि सरोज खान का जन्म 22 नवंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। कम ही लोगों को पता है कि उनका असली नाम निर्मला नागपाल था। उनके पिता का नाम किशनचंद सद्धू सिंह और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह था। विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। मात्र तीन साल की उम्र में सरोज ने बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। वह पहली फिल्म ‘नजराना’ में बेबी श्यामा के रूप में नजर आईं।
कोरियोग्राफी की दुनिया में सरोज खान को सब ‘मास्टर जी’ कहकर पुकारते थे, मगर यह पदवी हासिल करने के सफर में उन्हें कठिन संघर्ष से गुजरना पड़ा। निजी और पेशेवर दोनों ही जिंदगियों में उन्होंने कठिन मेहनत की। बता दें कि सरोज खान का जन्म 22 नवंबर 1948 को मुंबई में हुआ था। कम ही लोगों को पता है कि उनका असली नाम निर्मला नागपाल था। उनके पिता का नाम किशनचंद सद्धू सिंह और मां का नाम नोनी सद्धू सिंह था। विभाजन के बाद सरोज खान का परिवार पाकिस्तान से भारत आ गया था। मात्र तीन साल की उम्र में सरोज ने बतौर बाल कलाकार फिल्मों में काम करना शुरू कर दिया था। वह पहली फिल्म ‘नजराना’ में बेबी श्यामा के रूप में नजर आईं।
50 के दशक में रखा नृत्य की दुनिया में कदम
इसके बाद 50 के दशक में सरोज खान ने बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। डांस की ट्रेनिंग उन्होंने कोरियोग्राफर बी.सोहनलाल से ली। उस वक्त सरोज 13 साल की थीं और 43 साल के बी. सोहनलाल को वह पसंद आ गईं। सरोज खान को भी प्रेम का अहसास हुआ। उम्र का बड़ा फासला था, लेकिन सरोज खान ने इसे ताक पर रखा और 1961 में बी. सोहनलाल के साथ शादी कर ली। मगर, जिंदगी के इस सबसे मजबूत बंधन की नींव एक झूठ पर रखी गई थी। बी. सोहनलाल पहले से शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता थे। और…सरोज खान इस सच से अनजान थीं।
इसके बाद 50 के दशक में सरोज खान ने बैकग्राउंड डांसर के तौर पर काम करना शुरू कर दिया था। डांस की ट्रेनिंग उन्होंने कोरियोग्राफर बी.सोहनलाल से ली। उस वक्त सरोज 13 साल की थीं और 43 साल के बी. सोहनलाल को वह पसंद आ गईं। सरोज खान को भी प्रेम का अहसास हुआ। उम्र का बड़ा फासला था, लेकिन सरोज खान ने इसे ताक पर रखा और 1961 में बी. सोहनलाल के साथ शादी कर ली। मगर, जिंदगी के इस सबसे मजबूत बंधन की नींव एक झूठ पर रखी गई थी। बी. सोहनलाल पहले से शादीशुदा थे और चार बच्चों के पिता थे। और…सरोज खान इस सच से अनजान थीं।

अकेले की बच्चों की परवरिश
सरोज खान अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश थीं। उनका परिवार बढ़ा। मां बनने के बाद उनकी खुशी में और इजाफा हुआ, लेकिन यह खुशी अचानक ही ओझल सी हो गई। मां बनने के बाद सरोज का सामना सबसे बड़े सच से हुआ और उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। यह सच था पति की पहली शादी का पता चलना। दुख तब और बढ़ गया जब बी. सोहनलाल ने सरोज खान से पैदा अपने बच्चों को अपना नाम देने से साफ इनकार कर दिया। सरोज खान ने इतनी कम उम्र में शादी की थी कि खुद उन्हें शादी का मतलब नहीं पता था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया था और मेरे शादी हो गई थी।’ मगर, जब पति ने बच्चों को नाम देने से इनकार कर दिया तो बी. सोहनलाल और सरोज खान के बीच फासले बढ़ते गए और फिर 1965 में दोनों में अलगाव हो गया। बता दें कि सोहनलाल से सरोज खान के तीन बच्चे हुए। इनमें से एक बच्चे की मौत हो गई। बी. सोहनलाल से अलग होने के बाद सरोज खान पर अकेले ही बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई। इस दौरान उन्होंने बहुत परेशानियों का सामना किया। हालांकि, बाद में सरोज खान ने बाद वर्ष 1975 में सरदार रोशन खान से दूसरी शादी की और अपना धर्म बदल लिया। दोनों की एक बेटी सुकैना खान है। हालांकि, इस्लाम कबूलने को लेकर एक बार सरोज खान ने कहा था कि ‘मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया था। मुझे इस्लाम धर्म से प्रेरणा मिलती है। मुझ पर कोई दबाव नहीं था।’
सरोज खान अपनी शादीशुदा जिंदगी में खुश थीं। उनका परिवार बढ़ा। मां बनने के बाद उनकी खुशी में और इजाफा हुआ, लेकिन यह खुशी अचानक ही ओझल सी हो गई। मां बनने के बाद सरोज का सामना सबसे बड़े सच से हुआ और उनके पैरों के नीचे से जमीन खिसक गई। यह सच था पति की पहली शादी का पता चलना। दुख तब और बढ़ गया जब बी. सोहनलाल ने सरोज खान से पैदा अपने बच्चों को अपना नाम देने से साफ इनकार कर दिया। सरोज खान ने इतनी कम उम्र में शादी की थी कि खुद उन्हें शादी का मतलब नहीं पता था। उन्होंने एक इंटरव्यू में बताया था, ‘मैं उन दिनों स्कूल में पढ़ती थी तभी एक दिन मेरे डांस मास्टर सोहनलाल ने गले में काला धागा बांध दिया था और मेरे शादी हो गई थी।’ मगर, जब पति ने बच्चों को नाम देने से इनकार कर दिया तो बी. सोहनलाल और सरोज खान के बीच फासले बढ़ते गए और फिर 1965 में दोनों में अलगाव हो गया। बता दें कि सोहनलाल से सरोज खान के तीन बच्चे हुए। इनमें से एक बच्चे की मौत हो गई। बी. सोहनलाल से अलग होने के बाद सरोज खान पर अकेले ही बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई। इस दौरान उन्होंने बहुत परेशानियों का सामना किया। हालांकि, बाद में सरोज खान ने बाद वर्ष 1975 में सरदार रोशन खान से दूसरी शादी की और अपना धर्म बदल लिया। दोनों की एक बेटी सुकैना खान है। हालांकि, इस्लाम कबूलने को लेकर एक बार सरोज खान ने कहा था कि ‘मैंने अपनी मर्जी से इस्लाम अपनाया था। मुझे इस्लाम धर्म से प्रेरणा मिलती है। मुझ पर कोई दबाव नहीं था।’

बड़ी-बड़ी सिने हस्तियों को सिखाया डांस
1974 में रिलीज हुई फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ से सरोज एक स्वतंत्र कोरियोग्राफर बन गईं। हालांकि, उनके काम को काफी समय बाद पहचान मिली। बाद में एक वक्त ऐसा आया कि फिल्म ‘मिस्टर इंडिया, ‘नगीना’, ‘चांदनी’, ‘तेजाब’, ‘थानेदार’ और ‘बेटा’ के गानों ने धूम मचा दी और सरोज खान की गिनती बॉलीवुड के बड़े कोरियाग्राफर्स में होने लगी। उन्होंने अपने करियर में 3000 से ज्यादा गानों पर बॉलीवुड के हर बड़े कलाकार को डांस सिखाया। 1988 में आई फिल्म तेजाब के ‘एक दो तीन…’ गाने ने सरोज की किस्मत रातोंरात बदल दी थी। इसके बाद माधुरी दीक्षित पर ही फिल्माए गए ‘बेटा’ फिल्म के गाने ‘धक धक करने लगा…’ ने भी सरोज खान को बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद सरोज खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 03 जुलाई 2020 को सरोज खान हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गईं।
1974 में रिलीज हुई फिल्म ‘गीता मेरा नाम’ से सरोज एक स्वतंत्र कोरियोग्राफर बन गईं। हालांकि, उनके काम को काफी समय बाद पहचान मिली। बाद में एक वक्त ऐसा आया कि फिल्म ‘मिस्टर इंडिया, ‘नगीना’, ‘चांदनी’, ‘तेजाब’, ‘थानेदार’ और ‘बेटा’ के गानों ने धूम मचा दी और सरोज खान की गिनती बॉलीवुड के बड़े कोरियाग्राफर्स में होने लगी। उन्होंने अपने करियर में 3000 से ज्यादा गानों पर बॉलीवुड के हर बड़े कलाकार को डांस सिखाया। 1988 में आई फिल्म तेजाब के ‘एक दो तीन…’ गाने ने सरोज की किस्मत रातोंरात बदल दी थी। इसके बाद माधुरी दीक्षित पर ही फिल्माए गए ‘बेटा’ फिल्म के गाने ‘धक धक करने लगा…’ ने भी सरोज खान को बड़ी पहचान दिलाई। इसके बाद सरोज खान ने कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। 03 जुलाई 2020 को सरोज खान हमेशा के लिए इस दुनिया को अलविदा कह गईं।

