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राजस्थान में बनी सोने की अयोध्या की लाइव रिपोर्ट:25 साल में बनी, सुरक्षा के लिए कांच-लाल पत्थर की दीवार, स्पेशल परमिशन से शूट किया

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सोने की लंका के बारे में तो आपने पढ़ा, सुना और टीवी सीरियल्स में देखा होगा। आज हम आपको दिखाने जा रहे हैं सोने की अयोध्या। ये सोने की अयोध्या है, राजस्थान के अजमेर में सोनीजी की नसियां में। यहां सोने की अयोध्या के साथ, कैलाश पर्वत की झांकी, देव विमान और सुमेरु पर्वत की झांकी, भगवान आदिनाथ या ऋषभदेव के जीवन के सोने से बने पांच चरण (पंच कल्याणक) भी हैं।

130 साल में पहली बार इसे आम लोगों के लिए खोला जा रहा है। सुरक्षा के लिए सोने की अयोध्या और झांकियों को कांच और लाल पत्थर की दीवार से कवर किया गया है। आम लोगों को आगे जाने की अनुमति नहीं है। भास्कर ने विशेष अनुमति लेकर ये स्पेशल वीडियो शूट किया है…

आज महावीर जयंती के मौके पर जानिए, सोनी जी की नसियां और सोने की अयोध्या के बारे में…

अयोध्या के साथ बना सुमेरु पर्वत का फोटो।

जयपुर में बनी थी सोने की अयोध्या, फिर लाई गई अजमेर

सोनी जी की नसियां के ट्रस्टी प्रमोद सोनी ने बताया- 130 साल पहले सेठ मूलचंद नेमीचंद सोनी ने सोनी जी की नसियां​​​​​ का निर्माण शुरू कराया। बेटे सेठ भागचंद सोनी ने इसका निर्माण पूरा करवाया। इस नसियां के अंदर सोने की अयोध्या रखी गई है। वहीं, नसियां का बाहरी निर्माण लाल पत्थरों से किया गया है। इसलिए इसे लाल मंदिर भी कहा जाता है। मंदिर का इंटीरियर बेल्जियम के स्टेन ग्लास, मिनरल कलर पेंटिंग्स और स्टेन ग्लासवर्क से सजाया गया है।

नसियां का निर्माण 10 अक्टूबर 1864 में प्रारंभ हुआ था। जो 1865 में पूरा हुआ। सन् 1895 में सोने की अयोध्या का निर्माण शुरू किया गया। इसे बनने में 25 साल लगे थे। इसका निर्माण जयपुर में किया गया था। कार्य पूरा होने पर सन् 1895 में जयपुर में दस दिन तक विशाल मेला लगा। तत्कालीन जयपुर महाराजा माधोसिंह भी इसमें शामिल हुए। इसे कुछ दिन जयपुर के अलबर्ट हॉल में रखा गया। इसके बाद सोने की अयोध्या को अजमेर में बनी सोनी जी की नसियां में रखा गया। सन् 1953 में सोनी जी की नसियां में मान स्तंभ का निर्माण गया। नगरी में भगवान ऋषभदेव के पंच कल्याणक को भी दिखाया गया है, जो आचार्य जिनसेन द्वारा रचित आदिपुराण पर आधारित है।

सोने की अयोध्या को सही ढंग से दिखाने के लिए सोनजी की नसियां में 24.3 मीटर x 12.2 मीटर का खास हॉल बनाया गया। यह कांच और लाल पत्थर की दीवार से बना है। लोग कांच की खिड़की की मदद से इस सोने की नगरी को देख सकते हैं। यह बहुत कम प्रवेश शुल्क पर पूरे साल हर दिन सभी धर्मों के लोगों के लिए खुला रहता है।

इस पूरे नसियां को दो भागों में बांटा गया है। एक बाग में ऋषभदेव की मूर्ति है। वहीं दूसरी तरफ संग्रहालय में सोने की अयोध्या और बाकी झांकियां बनाई गई हैं।
इस पूरे नसियां को दो भागों में बांटा गया है। एक बाग में ऋषभदेव की मूर्ति है। वहीं दूसरी तरफ संग्रहालय में सोने की अयोध्या और बाकी झांकियां बनाई गई हैं।

मंदिर में दो भाग, एक में भगवान आदिनाथ की मूर्ति स्थापित

नसियां को दो भागों में विभाजित किया गया है। मंदिर का एक हिस्सा पूजा क्षेत्र है। इसमें भगवान आदिनाथ या ऋषभदेव की मूर्ति स्थापित है, जबकि दूसरे हिस्से में एक संग्रहालय और हॉल शामिल है। संग्रहालय के इंटीरियर में भगवान आदिनाथ के जीवन के पांच चरणों (पंच कल्याणक) को दर्शाया गया है।

कलात्मक 82 फीट ऊंचा मान स्तम्भ

इस ऐतिहासिक नसियां में प्रवेश करते ही सबसे पहले 82 फीट ऊंचे मान स्तम्भ के दर्शन होते हैं। सन् 1953 में बड़े समारोह के साथ इसकी प्रतिष्ठा व प्रतिमा स्थापना की गई थी। दस दिन तक बड़ा उत्सव हुआ। इसमें सोनी परिवार के साथ अन्य हजारों भक्तों ने भाग लिया। सारे मंदिर की सजावट दीपों द्वारा की गई।

सोनी जी की नसियां की एंट्री पर लगा मान स्तम्भ।
सोनी जी की नसियां की एंट्री पर लगा मान स्तम्भ।

हालही में खोले गए सभी पंच कल्याणक

सोनी जी की नसियां के ट्रस्टी प्रमोद सोनी ने बताया- सोने से बने पंच कल्याण के स्थापना 1895 में की गई थी। इनमें से दो पंचकल्याण को कभी आम लोगों के लिए ओपन नहीं किया गया था। 27 मार्च से इसका लोकार्पण कर सभी पंच कल्याण आम लोगों के लिए दर्शन के लिए खोला गया। इसमें कुल मिलाकर छोटी बड़ी करीब 1200 से 1500 अलग अलग झांकियां हैं।

सोने की पांच झांकियों को कहा जाता है पंच कल्याणक
सोनी जी की नसियां को संभालने वाले भोजराज जोशी ने बताया- यहां बनी अयोध्या नगरी में राजा के महल, जैन मंदिर, सेना, रथ, हाथी-घोडे़, नदियां, सड़कें, चारदीवारी, आम जनता, मकान आदि हैं। सोने की अयोध्या में पांच झांकियां हैं, जिन्हें पंचकल्याणक भी कहा जाता है। अयोध्या के अलावा नीचे की तरफ कैलाश पर्वत, जहां 72 जिनालय बने हैं। इसी प्रकार हस्तिनापुर, जिसमें भगवान के आहार को दर्शाया है। यहां पर ही एक हिस्से में स्वर्णिम रथ व हाथी घोडे़ भी हैं। पूरा क्षेत्र करीब चार बीघा यानी 7000 वर्ग गज एरिया है। सालाना करीब चालीस से पचास हजार मेहमान आते हैं, जिसमें देशी ही नहीं बल्कि विदेशी भी शामिल है। अयोध्या समेत सभी झांकियां तांबे से बनी हुई। इस पर सोने की परत चढ़ी हुई है।

ठीकरी ग्लास आकर्षण का केन्द्र

भोजराज जोशी ने बताया- सोनी जी की नसियां में ठीकरी ग्लास लगे हैं, जो बहुत महंगे होते हैं। देश में केवल गुजरात में एक ही फैक्ट्री है, जहां ग्लास हाथ से बनता है। इससे लाइटिंग आकर्षक हो जाती है। यहां ये ठीकरी ग्लास आकर्षण का केंद्र बने हुए हैं।

आगे देखिए- सोने से बने पंच कल्याण…

गर्भ कल्याणक में सोने की अयोध्या नगरी का नजारा।
गर्भ कल्याणक में सोने की अयोध्या नगरी का नजारा।

गर्भ कल्याणक- माता मरुदेवी ने रात में 16 स्वप्न देखे थे, जिसके अनुसार तीर्थंकर का अवतरण अयोध्या में हुआ। इसमें देवविमान और माता के स्वप्न दिखाए गए हैं।

जन्म कल्याणक में ऐरावत हाथी पर बाल ऋषभदेव का दृश्य।
जन्म कल्याणक में ऐरावत हाथी पर बाल ऋषभदेव का दृश्य।

जन्म कल्याणक- ऋषभदेव के जन्म पर इंद्र के आसन कांपने लगा। ऐरावत हाथी पर बालक ऋषभदेव को सुमेरू पर्वत ले जाने, पांडुकशिला पर अभिषेक और देवों की शोभायात्रा को दिखाया है।

तप कल्याणक में नीलांजना का नृत्य प्रदर्शन करती झांकी।
तप कल्याणक में नीलांजना का नृत्य प्रदर्शन करती झांकी।
संसार त्याग कर दिगम्बर मुनि बनने और केशलोचन को भी दिखाया गया है।
संसार त्याग कर दिगम्बर मुनि बनने और केशलोचन को भी दिखाया गया है।

तप कल्याणक- महाराज ऋषभदेव के दरबार में अप्सरा नीलांजना का नृत्य, ऋषभदेव के संसार त्याग कर दिगम्बर मुनि बनने और केशलोचन को दिखाया गया है।

केवलज्ञान कल्याणक में तपस्या में लीन ऋषभदेव को दिखाया गया है।
केवलज्ञान कल्याणक में तपस्या में लीन ऋषभदेव को दिखाया गया है।

केवलज्ञान कल्याणक- हजार वर्ष की तपस्या में लीन ऋषभदेव, कैलाश पर्वत पर केवल ज्ञान प्राप्ति, राजा श्रेयांस द्वारा मुनि ऋषभदेव को प्रथम आहार को दिखाया गया है।

मोक्ष कल्याणक में कैलाश पर्वत की सजी झांकी।
मोक्ष कल्याणक में कैलाश पर्वत की सजी झांकी।

मोक्ष कल्याणक- भगवान ऋषभदेव का कैलाश पर्वत से निर्वाण का स्वर्ण कमल दृश्य, पुत्र भरत द्वारा 72 स्वर्णिम मंदिर को दर्शाया गया है।

यह है खासियत

  • पूरे मंदिर में कहीं पर पंखे नहीं लगे हैं, फिर भी मंदिर ठंडा रहता है।
  • माता मरूदेवी के 16 स्वपन से लेकर प्रथम तीर्थंकर के जन्म एवं वैराग्य और मोक्ष यात्रा तक का दृश्यांकन है।
  • जैन साधु-संतों के लिए खोली जाती है, मंदिर में लकड़ी पर कांच और सोने की परत की कारीगरी की गई है।
  • आम दर्शक कांच की खिड़कियों से ही सोने की इस नगरी को देख सकते हैं, इसलिए निर्धारित टिकट दर है।
  • नसियां के जैन मंदिर में भगवान आदिनाथ यानी प्रथम तीर्थंकर ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा है।
यहां पर स्वर्ण कमलों को भी सजाया गया है।
यहां पर स्वर्ण कमलों को भी सजाया गया है।
सोनी जी की नसियां में अयोध्या नगर को काफी बारीकी से बनाया गया है।
सोनी जी की नसियां में अयोध्या नगर को काफी बारीकी से बनाया गया है।

खुलने का समय

प्रतिदिन सुबह 8.30 बजे से 4.30 बजे तक पर्यटकों के लिए खुला होता है।

मंदिर प्रांगण में तीन वेदियां

मुख्य मंदिर के प्रांगण में तीन वेदियां हैं। इसमें तीर्थंकरों की प्रतिमाएं विराजमान हैं। मध्य वेदी में भगवान ऋषभदेव की विशाल प्रतिमा है। यह भगवान के समवशरण का दिग्दर्शन है। इस अवस्था में भगवान संसार के दुखी जीवों के लिये जन्म-मृत्यु के नाश करने वाले सच्चे धर्म का उपदेश देते हैं। इस भाग में केवल जैनियों को धार्मिक आराधना संपन्न करने की अनुमति है।

नसियां में लगाई गई खंडित जैन मूर्तियों की एग्जीबिशन।
नसियां में लगाई गई खंडित जैन मूर्तियों की एग्जीबिशन।

12वीं शताब्दी की खंडित जैन मूर्तियां स्थापित

प्रमोद सोनी ने बताया- संग्रहालय के अलग भाग में 12वीं शताब्दी की खंडित जैन मूर्तियां भी स्थापित हैं। इन्हें अजमेर के ही अढ़ाई दिन का झोपड़ा से लाया गया था। करीब महीना भर पहले ही टूरिस्ट के लिए नसियां में इसकी अलग से एग्जीबिशन लगाई गई है।

सोनी जी की नसियां का निर्माण करवाने वाला सोनी परिवार।
सोनी जी की नसियां का निर्माण करवाने वाला सोनी परिवार।

इन्होंने करवाया सोन जी की नसियां का निर्माण

निर्माण कर्ता सन्
रायबहादुर सेठ मूलचंद सोनी 1830-1901
रायबहादुर सेठ नेमी चंद सोनी 1856-1917
रायबहादुर सेठ टीकम चंद सोनी 1882-1934
रायबहादुर सेठ भागचंद सोनी 1904-1983

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