
इस बार नवरात्र में शुक्र अस्त रहेगा। ऐसे में मां की नौ दिवसीय आराधना, अनुष्ठान, स्तोत्र पाठ तो होंगे, लेकिन शुभ कार्य नहीं किए जा सकेंगे। इस दौरान ग्रहों की शांति के लिए पूजा हो सकेगी। शारदीय नवरात्र इस बार ब्रह्म मुहूर्त में उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र और चित्र नक्षत्र के साथ शुक्ल योग में आरंभ होगा। दो अक्तूबर को मूल नक्षत्र में सरस्वती देवी का आवाहन होगा।
इसी दिन महासप्तमी भी होगी और शत्रु पराजय के लिए मां कालरात्रि के स्वरूप की आराधना की जाएगी। तीन अक्तूबर को दुर्गाष्टमी पर घरों से लेकर मंदिरों तक कन्या पूजन, लक्ष्मी पूजन के विशेष अनुष्ठान होंगे। इसी तरह चार अक्तूबर को दुर्गा नवमी पर हवन-पूजन के साथ मां की आराधना के नौ दिवसीय अनुष्ठानों की पूर्णाहुति होगी।
पांच अक्तूबर को श्रवण नक्षत्र और विजय मुहूर्त में विजय दशहरा का पर्व मनाया जाएगा। आदिशक्ति स्वरूपा की आराधना के लिए संगमनगरी तैयार है। ज्योतिषाचार्य पं. बृजेंद्र मिश्र के मुताबिक ब्रह्म मुहूर्त में वेदियों पर घट पूजन के साथ मां का आह्वान सबसे उत्तम रहेगा। इसी के साथ कलश स्थापना कर नौ दिन के व्रत अनुष्ठान आरंभ होंगे।

शहर केदेवी मंदिरों में सोमवार से नवरात्र के क्रम में झांकियां सजाई जाएंगी। इसी के साथ नौ दिनों में मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की झांकियां सजाई जाएंगी। महाशक्तिपीठ ललिता धाम को फूलों और झालरों से सजा दिया गया है। वहां मां के प्रथम रूप शैलपुत्री की झांकी सजाई जाएगी। इसी तरह कल्याणी देवी में भी नवरात्र के प्रथम दिन मां कल्याणी देवी का शैलपुत्री के रूप में शृंगार किया जाएगा। अलोप शंकरी माता के मंदिर को भी भव्य सजा दिया गया है। भोर से ही वहां भक्तों की लंबी कतार दर्शन के लिए लग जाएगी।
मुहूर्त: सुबह 5:55 बजे से पहले कलश स्थापन किया जाना सबसे उत्तम होगा
सुबह 06:20 बजे से 10:19 बजे तक भी कलश स्थापना करें
अभिजीत मुहूर्त
सुबह 11:54 बजे से दोपहर 12:42 बजे तक अभिजीत मुहूर्त में किया जा सकेगा कलश स्थापन

शारदीय नवरात्र की पूर्व संध्या पर बाजारों में खूब रौनक रही। देवी मूर्तियों सहित देवी को अर्पित की जाने वाली चुनरी, नारियल, पूजा सामग्रीकी खरीद के लिए दुकानों पर श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। साथ ही श्रद्धालुओं ने व्रत से जुड़ी सामग्री जैसे सिंगाड़े का आटा, कुट्टू की दलिया, साबुदाना, मूंगफली का दाना, सेंधा नमक, मिश्री और तरह-तरह के मेवों की भी खरीद की।
हालांकि पूजा से लेकर व्रत तक की सामग्री की कीमतें बीते वर्ष की अपेक्षा अधिक रहीं। चौक में नारियल, चुनरी बेचने वाले संजय बताते हैं, देवी को अर्पित करने के लिए चुनरी खासतौर पर कानपुर और दिल्ली से मंगाई गई है। हां, बीते वर्ष की अपेक्षा चुनरी के दाम में15 से 20 रुपये तक का अंतर आया है। इसी तरह तमिलनाडु और आंध्रप्रदेश से आने वाला नारियल भी पांच से दस रुपये तक महंगा हुआ है। बीते वर्ष 100 नारियल जहां 1200 रुपये में मिलते थे , वही अब 100 नारियल के 2000 रुपये देने पड़ रहे हैं ।


देवी के शृंगार के लिए सजावटी सामानों की पूरी रेंज बाजार में मौजूद है। अबकी देवी के मनोहारी शृंगार के लिए जरदोजी वर्क, मोरपंखी युक्त लहंगा-चुनरी, जड़ाऊ कंगन खासतौर पर बंगलूरू से मंगाया गया है। चौक, कटरा,सिविल लाइंस, मीरापुर, प्रीतमनगर, दारागंज, मुट्ठीगंज आदि के बाजारों में खरीदारों की सुविधा के लिए दुकानें रात तक खुली रहीं।

