GST बचत उत्सव Vs अमेरिकी टैरिफ… किसमें कितना है दम, देख लेंगे ट्रंप
देश में जीएसटी बचत उत्सव शुरू हो गया है। इससे त्योहारों में चीजें सस्ती होंगी। डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से होने वाले नुकसान की भरपाई होगी। हरदीप सिंह पुरी ने कहा कि इससे जीडीपी बढ़ेगी। नरेंद्र मोदी ने कहा कि यह आत्मनिर्भर भारत की ओर कदम है। इससे सभी वर्गों को फायदा होगा। कारोबार आसान होगा और निवेश बढ़ेगा।

केंद्रीय पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने कहा है कि जीएसटी सुधारों से लोगों में खुशी की लहर है। इससे देश की जीडीपी 0.8 फीसदी तक बढ़ सकती है। नए जीएसटी सुधार आज से लागू हो गए हैं। पुरी के अनुसार, आत्मनिर्भरता के रास्ते पर चलकर ही भारत विकसित बनेगा। नवरात्र के साथ बजट उत्सव भी शुरू हो गया है। जीएसटी की दरें कम होने से समाज के सभी वर्गों को फायदा होगा।
जीएसटी 2.0 से टैरिफ की पूरी भरपाई
इसके उलट तमाम रिपोर्टों के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की ओर से भारतीय सामानों पर लगाए गए 50% टैरिफ से भारत की जीडीपी पर 0.5% से 0.6% तक का प्रतिकूल असर पड़ने का अनुमान है। कुछ रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया है कि इसका असर 0.3% से लेकर 1% तक हो सकता है। इसका मतलब यह हुआ कि टैरिफ के असर की करीब पूरी की पूरी भरपाई जीएसटी सुधारों से हो जाएगी।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए देश को संबोधित करते हुए नवरात्र की शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि नवरात्र के पहले दिन से ही देश आत्मनिर्भर भारत की ओर एक बड़ा कदम बढ़ा रहा है। पीएम ने कहा कि अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों की शुरुआत जीएसटी बचत उत्सव है। इससे लोगों को बचत करने और अपनी पसंद की चीजें खरीदने में आसानी होगी।
हर वर्ग को होगा फायदा
पीएम मोदी ने कहा कि इस बचत उत्सव का फायदा गरीब, मध्यम वर्ग, नव मध्यम वर्ग, युवा, किसान, महिलाएं, दुकानदार, व्यापारी और उद्यमियों को मिलेगा। इस त्योहार के मौसम में हर घर में खुशहाली और मिठास बढ़ेगी। पीएम ने अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों और जीएसटी बचत उत्सव के लिए देश के करोड़ों परिवारों को बधाई दी। उन्होंने कहा कि ये सुधार भारत की विकास गाथा को आगे बढ़ाएंगे, कारोबार को आसान बनाएंगे, निवेश को आकर्षक बनाएंगे और हर राज्य को विकास की दौड़ में बराबर का भागीदार बनाएंगे। इस नए ढांचे से नियमों का पालन आसान होगा, कीमतें कम होंगी, उत्पादन बढ़ेगा और कृषि से लेकर ऑटोमोबाइल, एफएमसीजी से लेकर अक्षय ऊर्जा तक के उद्योगों को मदद मिलेगी। इससे जीवन यापन की लागत कम होगी, एमएसएमई मजबूत होंगे, टैक्स का दायरा बढ़ेगा और विकास होगा।

