
जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म हुए तीन साल हो गए हैं। कोई अनुच्छेद 370 हटने के बाद की उपलब्धियों गिना रहा है तो कोई जम्मू-कश्मीर में हुए बदलावों के बारे में बात कर रहा। इस बीच, बॉलीवुड अभिनेता अनुपम खेर ने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर श्रीनगर के लाल चौक का नजारा दिखाने वाले वीडियो को शेयर कर सबको हैरान कर दिया है। बता दें कि लाल चौक स्थित घंटाघर का ऐतिहासिक महत्व जम्मू कश्मीर के साथ-साथ देश में भी रहा है।

इस वीडियो में देखा जा सकता है कि श्रीनगर के लाल चौक पर लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है। बहुत सारे लोग अपनी गाड़ी पर बैठे, हाथ में तिरंगा लिए नजर आ रहे हैं। लोगों को भारत माता की जय का नारा लगाते हुए भी सुना जा सकता है। बता दें कि अनुपम खेर ने वीडियो को शेयर कर लोगों को अनुच्छेद 370 के हटने के बाद का नजारा दिखाने की कोशिश की है।

अभिनेता ने लिखते हैं, दोस्तों! ये नजारा कश्मीर में श्रीनगर के लाल चौक का है। आज का है!! देश बदल नहीं रहा, देश बदल गया है। जय हो! बता दें कि आज से तीन साल पहले यानी 2019 में 5 August के दिन जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाया गया था।

क्या है लाल चौक के घंटा घर का ऐतिहासिक महत्व?
घंटाघर का ऐतिहासिक महत्व जम्मू कश्मीर के साथ-साथ देश में भी है। पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस स्थान पर वर्ष 1948 में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। यह जगह जम्मू कश्मीर के मुखिया (सदर-ए-रियासत) शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और प्रधान मंत्री जवाहरलाल के समझौते का भी गवाह रहा है। इसके अलावा जब 1989 में कश्मीर में आतंकवाद शुरू हुआ तो इस जगह पर अलग-अलग घटनाएं हुईं। अलगाववादियों के लाल चौक मार्च के आह्वान पर प्रशासन इसे सील कर देता था। 2018 में अमरनाथ भूमि विवाद में बड़ी संख्या में लोग घंटाघर पर एकत्र हो गए थे। उन्हें अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने संबोधित किया था। उस समय यहां पर एक अन्य झंडा फहराया गया था।
घंटाघर का ऐतिहासिक महत्व जम्मू कश्मीर के साथ-साथ देश में भी है। पहले प्रधान मंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस स्थान पर वर्ष 1948 में राष्ट्रीय ध्वज फहराया था। यह जगह जम्मू कश्मीर के मुखिया (सदर-ए-रियासत) शेख मोहम्मद अब्दुल्ला और प्रधान मंत्री जवाहरलाल के समझौते का भी गवाह रहा है। इसके अलावा जब 1989 में कश्मीर में आतंकवाद शुरू हुआ तो इस जगह पर अलग-अलग घटनाएं हुईं। अलगाववादियों के लाल चौक मार्च के आह्वान पर प्रशासन इसे सील कर देता था। 2018 में अमरनाथ भूमि विवाद में बड़ी संख्या में लोग घंटाघर पर एकत्र हो गए थे। उन्हें अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक ने संबोधित किया था। उस समय यहां पर एक अन्य झंडा फहराया गया था।
आशा खबर / शिखा यादव

